सलमान खान का जन्मदिन: एक स्टार नहीं..
बताया जाता है कि जन्मदिन सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि एक एहसास होता है। और जब बात सलमान खान के जन्मदिन की उठती है, तब इस एहसास का अनुभव सिर्फ सलमान खान का नहीं, बल्कि उनके करोडों चाहने वालों का भी हो जाता है। २७ दिसंबर। यह तारीख हिंदी सिनेमा के इतिहास में सिर्फ एक दिन नहीं, बल्कि एक ‘भाई’ के आग़ाज़ का दिन है और आज, जब उनमें से एक और एक सुपरस्टार एक बार फिर से अपना जन्मदिन मना रहा होगा, तब मेरे मन
सच बूलाते हुए, सलमान बंधुओं सिर्फ एक एक्टर ही नहीं हैं। वे हमारे साथ साथ का एक हिस्सा हैं। 'मैने प्यार किया' के उस युवा से लेकर आज तक, उनका साथ साथ यादें याद हैं, या हमें हैं, चाहे वो 'हिंदुस्तान का एक युवा सपना हो या भौहें और बाबूला हो या धाकड़ हीरो और आमिर खानका 'भाईजान' हो, उनका यात्रा हमें साथ साथ किसी ना किसी दृश्य से जु़ड़ हुआ हे। हमऩे उन्हें रोमैंचक हिरो के रुप से प्यार किया होग
लेकिन सलमान की असली जादूगरी स्क्रीन से कहीं जžilaरे है। वह से 'बीइंग ह्यूमन' के वो चेहरे है, जो खुद की कमियों व गलतियों के साथ भी इंसानियत की मिसाल दिलाये खड़े हो। सलमान के सेवाइये की कहरी, 'बीइंग ह्यूमन' फाउंडेशन जैसी संस्था, सलमान को सेलिब्रिटी से कहीं आगे के वे संवेदनशील इंसान के तौर पर स्थापित करती है। जो वही वेली है ज
उनका व्यक्तित्व भी कुछ ही है - बेलाग़, बेबाक़ और पूरी तरह से अनफिल्टर्ड। एक कवि के- सितारा जो शहंशमहों को रखता है, इसलिये कि फिर भी वे बंद कार के शीशे लगाकर न होकर किसी साइकिल के ड निःशिकित वित गये हुए निःशिकित निकल पड़ते हैं, फ़ैंस के साथ खुलेपत सोच
बदलते समय में, अब यह दिखने लगा है कि समय के साथ वह न सिर्फ उम्र में युवा हो गए हैं हीं, बल्कि अपने भीतर के 'दिल के राजे' और 'मज़बूती' से अपनी पकड़ भी इस तरह रक्खे हैं कि चाहे उनके फ़िल्में हिट हुई हैं या न हुई हों, लेकिन 'सलमान खान' का स्टार फीका कभी नहीं पड़ता। शायद इसलिए है तो आज इस ख़ास दिन पर, बस इतना सा ख़्वाहिश है उनके लिए – ख़ुदा उन्हें सेहत और ख़ुशी दे। वह इसी तरह हम सबके दिलों में धड़कते रहें। उनकी मासूम सी शरारत भरी मुस्कान बनी रहे। क्योंकि सिनेमा के पर्दे पर चाहे कितने भी हीरो आएँ और जाएँ, लेकिन 'भाई' तो बस एक ही है। हैप्पी बर्थडे, सलमान। आपकी मौजूदगी बस ऐसे ही हमारे द
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